अद्येन्द्रवैवस्वतविष्णुमित्र; साध्याश्विवैश्वानरचन्द्रसूर्याः ।
द्रक्ष्यन्ति मे विक्रममप्रमेयं; विष्णोरिवोग्रं बलियज्ञवाटे ॥
अद्येन्द्रवैवस्वतविष्णुमित्र; साध्याश्विवैश्वानरचन्द्रसूर्याः ।
द्रक्ष्यन्ति मे विक्रममप्रमेयं; विष्णोरिवोग्रं बलियज्ञवाटे ॥
अन्वयः
अद्य today, इन्द्रवैवस्वतविष्णुमित्रसाध्याः च Indra, Vishnu, Mitra, Sadhyas वैश्वानरसूर्यचंद्राः Vysvanara, moon, Sun, अप्रमेयम् immeasurable, मेविक्रमम् my prowess, बलियज्ञवाटे in the place of fire sacrifice of Bali, विष्णोः Vishnu, उग्रम् इव terrible prowess like, द्रक्ष्यन्तु will witness.M N Dutt
To-day let Indra and Vaivasvata and Vişnu and Rudra and Sādhyas and Vaiśvānaras (Agni) and the Sun and the Moon, behold my immeasurable prowess, terrific like that of Vişņu at the sacrificial ground of Vali.Summary
"Today, Indra, Vishnu, Mitra, Sadhyas, Vysvanara, moon and Sun will witness my immeasurable prowess as they witnessed the terrible prowess of Vishnu at the fire sacrifice of Bali."पदच्छेदः
| अद्येन्द्रवैवस्वतविष्णुमित्रसाध्याश्विवैश्वानरचन्द्रसूर्याः | अद्य (अव्ययः)–इन्द्र–वैवस्वत–विष्णु–मित्र–साध्य–अश्विन्–वैश्वानर–चन्द्र–सूर्य (१.३) |
| द्रक्ष्यन्ति | द्रक्ष्यन्ति (√दृश् लृट् प्र.पु. बहु.) |
| मे | मद् (६.१) |
| विक्रमम् | विक्रम (२.१) |
| अप्रमेयं | अप्रमेय (२.१) |
| विष्णोर् | विष्णु (६.१) |
| इवोग्रं | इव (अव्ययः)–उग्र (२.१) |
| बलियज्ञवाटे | बलि–यज्ञ–वाट (७.१) |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | द्ये | न्द्र | वै | व | स्व | त | वि | ष्णु | मि | त्र |
| सा | ध्या | श्वि | वै | श्वा | न | र | च | न्द्र | सू | र्याः |
| द्र | क्ष्य | न्ति | मे | वि | क्र | म | म | प्र | मे | यं |
| वि | ष्णो | रि | वो | ग्रं | ब | लि | य | ज्ञ | वा | टे |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||