अन्वयः
पौलस्त्यः Paulastaya, स्वभावजरया by nature, युक्तम् wise, वृद्धम् aged, शरशतैः hundreds of arrows, चितम् pained, शाम्यन्तम् cooling, पावकम् इव like fire, वीरम् heroic, प्रजापतिसुतम् son of Prajapathi, दृष्टवा seeing, तमुपसङ्ग्रम्य going close, वाक्यम् words, अब्रवीत् spoke.
Summary
Paulastya (Vibheeshana of Paulastya clan), seeing the son of Prajapathi (Jambavan), who by nature was wise and aged, afflicted by hundreds of arrows, like a cooling fire sacrifice, went close by and spoke these words.
पदच्छेदः
| स्वभावजरया | स्वभाव–जरा (३.१) |
| युक्तं | युक्त (√युज् + क्त, २.१) |
| वृद्धं | वृद्ध (२.१) |
| शरशतैश्चितम् | शर–शत (३.३)–चित (√चि + क्त, २.१) |
| प्रजापतिसुतं | प्रजापति–सुत (२.१) |
| वीरं | वीर (२.१) |
| शाम्यन्तम् | शाम्यत् (√शम् + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| पावकम् | पावक (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्व | भा | व | ज | र | या | यु | क्तं |
| वृ | द्धं | श | र | श | तै | श्चि | तम् |
| प्र | जा | प | ति | सु | तं | वी | रं |
| शा | म्य | न्त | मि | व | पा | व | कम् |