अन्वयः
तदा then, घूर्णितमहाद्वारा mighty gates shaken, प्रभग्नगृहगोपुरा shattered the homes and gates, त्रासाकुला stricken with fear, लङ्का Lanka, रात्रौ night, प्रवृत्तेव dancing and shaking, अभवत् seemed.
M N Dutt
With her giant gateways shaking, and the doors of her edifices broken, that night Lankā, over-whelmed with fright, seemed to be dancing.
Summary
Then the mighty gates of Lanka shaking, homes shattered, stricken with fear that night it seemed Lanka was dancing.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| घूर्णितमहाद्वारा | घूर्णित (√घूर्ण् + क्त)–महत्–द्वार (१.१) |
| प्रभग्नगृहगोपुरा | प्रभग्न (√प्र-भञ्ज् + क्त)–गृह–गोपुर (१.१) |
| लङ्का | लङ्का (१.१) |
| त्रासाकुला | त्रास–आकुल (१.१) |
| रात्रौ | रात्रि (७.१) |
| प्रनृत्तेवाभवत् | प्रनृत्त (√प्र-नृत् + क्त, १.१)–इव (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | घू | र्णि | त | म | हा | द्वा | रा |
| प्र | भ | ग्न | गृ | ह | गो | पु | रा |
| ल | ङ्का | त्रा | सा | कु | ला | रा | त्रौ |
| प्र | नृ | त्ते | वा | भ | व | त्त | दा |