तस्य नानद्यमानस्य श्रुत्वा निनदमद्भुतम् ।
लङ्कास्था राक्षसाः सर्वे न शेकुः स्पन्दितुं भयात् ॥
तस्य नानद्यमानस्य श्रुत्वा निनदमद्भुतम् ।
लङ्कास्था राक्षसाः सर्वे न शेकुः स्पन्दितुं भयात् ॥
अन्वयः
नानाद्यमानस्य by the roaring, तस्य its, उत्तमम् loud, निनदम् sound, श्रुत्वा hearing, लङ्कास्थाः Lanka's, राक्षसाः Rakshasa, सर्वे all, भयात् in fear, स्पन्दितुम् stir, न शेकुः not possible.M N Dutt
Hearing those tremendous roars as he kept emitting cries, the powerful Rākṣasas were quite stupified.Summary
All the Rakshasas in Lanka hearing the loud roar of Hanuman were afraid and could not stir from there.पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| नानद्यमानस्य | नानद्यमान (६.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| निनदम् | निनद (२.१) |
| अद्भुतम् | अद्भुत (२.१) |
| लङ्कास्था | लङ्का–स्थ (१.३) |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| शेकुः | शेकुः (√शक् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| स्पन्दितुं | स्पन्दितुम् (√स्पन्द् + तुमुन्) |
| भयात् | भय (५.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | ना | न | द्य | मा | न | स्य |
| श्रु | त्वा | नि | न | द | म | द्भु | तम् |
| ल | ङ्का | स्था | रा | क्ष | साः | स | र्वे |
| न | शे | कुः | स्प | न्दि | तुं | भ | यात् |