वज्रालयं वैश्वरणालयं च; सूर्यप्रभं सूर्यनिबन्धनं च ।
ब्रह्मासनं शंकरकार्मुकं च; ददर्श नाभिं च वसुंधरायाः ॥
वज्रालयं वैश्वरणालयं च; सूर्यप्रभं सूर्यनिबन्धनं च ।
ब्रह्मासनं शंकरकार्मुकं च; ददर्श नाभिं च वसुंधरायाः ॥
अन्वयः
वज्रालयम् Vajralayaam (where Brahma gave Indra thunderbolt), सूर्यप्रभम् shining like the Sun, वैश्रवणालयं च the abode of Kubera, सूर्यनिबन्धनं च the spot where Sun was bound, ब्रह्मासनम् Brahma's abode, शङ्करकार्मुकं च the abode of the bow belonging to Lord Siva, वसुन्धरायाः the earth's, नाभिं च navel, ददर्श saw.Summary
He saw Vajralayam (where Brahma gave Indra the thunderbolt), the abode of Kubera shining like the Sun, the spot where the Sun was bound, Brahma's abode and the abode of the bow of Lord Siva, and the earth navel.पदच्छेदः
| वज्रालयं | वज्र–आलय (२.१) |
| वैश्रवणालयं | वैश्रवणालय (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सूर्यप्रभं | सूर्यप्रभ (२.१) |
| सूर्यनिबन्धनं | सूर्य–निबन्धन (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ब्रह्मासनं | ब्रह्मासन (२.१) |
| शंकरकार्मुकं | शंकर–कार्मुक (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| नाभिं | नाभि (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वसुंधरायाः | वसुंधरा (६.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | ज्रा | ल | यं | वै | श्व | र | णा | ल | यं | च |
| सू | र्य | प्र | भं | सू | र्य | नि | ब | न्ध | नं | च |
| ब्र | ह्मा | स | नं | शं | क | र | का | र्मु | कं | च |
| द | द | र्श | ना | भिं | च | व | सुं | ध | रा | याः |