कैलासमग्र्यं हिमवच्छिलां च; तथर्षभं काञ्चनशैलमग्र्यम् ।
स दीप्तसर्वौषधिसंप्रदीप्तं; ददर्श सर्वौषधिपर्वतेन्द्रम् ॥
कैलासमग्र्यं हिमवच्छिलां च; तथर्षभं काञ्चनशैलमग्र्यम् ।
स दीप्तसर्वौषधिसंप्रदीप्तं; ददर्श सर्वौषधिपर्वतेन्द्रम् ॥
अन्वयः
उग्रम् elevated Siva, कैलासम् Kailas, हिमवच्छिलां च rocks of Himavat, तथा that way, ऋषभम् Rshaba, अग्य्रम् foremost काञ्चनशैलम् golden mountain, सन्दीप्तसर्वौषधिसम्प्रदीप्तम् glowing medicinal herbs illumining, सर्वौषधिपर्वतेन्द्रम् great mountain on which all medicinal herbs were, ददर्श saw.Summary
He saw Kailas, the rocks of Himalayas, that way on the Rshaba the foremost Lord Siva, the golden mountain, and the great mountain on which grew, glowing medicinal herbs.पदच्छेदः
| कैलासम् | कैलास (२.१) |
| अग्र्यं | अग्र्य (२.१) |
| हिमवच्छिलां | हिमवन्त्–शिला (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तथर्षभं | तथा (अव्ययः)–ऋषभ (२.१) |
| काञ्चनशैलम् | काञ्चन–शैल (२.१) |
| अग्र्यम् | अग्र्य (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| दीप्तसर्वौषधिसंप्रदीप्तं | दीप्त (√दीप् + क्त)–सर्व–ओषधि–संप्रदीप्त (√संप्र-दीप् + क्त, २.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सर्वौषधिपर्वतेन्द्रम् | सर्व–औषधि–पर्वत–इन्द्र (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कै | ला | स | म | ग्र्यं | हि | म | व | च्छि | लां | च |
| त | थ | र्ष | भं | का | ञ्च | न | शै | ल | म | ग्र्यम् |
| स | दी | प्त | स | र्वौ | ष | धि | सं | प्र | दी | प्तं |
| द | द | र्श | स | र्वौ | ष | धि | प | र्व | ते | न्द्रम् |