स तं समुत्पाट्य खमुत्पपात; वित्रास्य लोकान्ससुरान्सुरेन्द्रान् ।
संस्तूयमानः खचरैरनेकै;र्जगाम वेगाद्गरुडोग्रवीर्यः ॥
स तं समुत्पाट्य खमुत्पपात; वित्रास्य लोकान्ससुरान्सुरेन्द्रान् ।
संस्तूयमानः खचरैरनेकै;र्जगाम वेगाद्गरुडोग्रवीर्यः ॥
अन्वयः
सः he, तम् them, समुत्पाट्य striking terror, ससुरासुरेन्द्रान् leaders, Devatas and demons, लोकान् world, वित्रास्य inhabiting, खम् sky, उत्पापात uprooting, अनेकैः many, खचरैः aerial creatures, संस्तूयमानः praised, गरुडोग्रवेगः at terrible speed of Garuda, वेगात् hurried, जगाम went.Summary
Striking terror among Devatas and demons and leaders inhabiting the world, uprooting the mountain he hurried at Garuda's speed into the sky praised by aerial creatures.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| समुत्पाट्य | समुत्पाट्य (√समुत्-पाटय् + ल्यप्) |
| खम् | ख (२.१) |
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वित्रास्य | वित्रास्य (√वि-त्रासय् + ल्यप्) |
| लोकान् | लोक (२.३) |
| ससुरान् | स (अव्ययः)–सुर (२.३) |
| सुरेन्द्रान् | सुर–इन्द्र (२.३) |
| संस्तूयमानः | संस्तूयमान (√सम्-स्तु + शानच्, १.१) |
| खचरैर् | खचर (३.३) |
| अनेकैर् | अनेक (३.३) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वेगाद् | वेग (५.१) |
| गरुडोग्रवीर्यः | गरुड–उग्र–वीर्य (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तं | स | मु | त्पा | ट्य | ख | मु | त्प | पा | त |
| वि | त्रा | स्य | लो | का | न्स | सु | रा | न्सु | रे | न्द्रान् |
| सं | स्तू | य | मा | नः | ख | च | रै | र | ने | कै |
| र्ज | गा | म | वे | गा | द्ग | रु | डो | ग्र | वी | र्यः |