तावप्युभौ मानुषराजपुत्रौ; तं गन्धमाघ्राय महौषधीनाम् ।
बभूवतुस्तत्र तदा विशल्या;वुत्तस्थुरन्ये च हरिप्रवीराः ॥
तावप्युभौ मानुषराजपुत्रौ; तं गन्धमाघ्राय महौषधीनाम् ।
बभूवतुस्तत्र तदा विशल्या;वुत्तस्थुरन्ये च हरिप्रवीराः ॥
अन्वयः
तौ the two, मानुषराजपुत्रौ sons of ruler of men, उभौ both, महौषधीनाम् of the great herbs, तंगन्धम् that fragrance, आघ्राय inhaling, तदा then, विशल्यौ free from wounds, बभूवतुः restored, अन्ये others, हरिप्रहीराश्च Vanara heroes, उत्तस्थुः got up.Summary
The two sons of the ruler of men inhaling the fragrance of the herbs became free from wounds. Other Vanara heroes also got restored.पदच्छेदः
| तावप्युभौ | तद् (१.२)–अपि (अव्ययः)–उभ् (१.२) |
| मानुषराजपुत्रौ | मानुष–राजन्–पुत्र (१.२) |
| तं | तद् (२.१) |
| गन्धम् | गन्ध (२.१) |
| आघ्राय | आघ्राय (√आ-घ्रा + ल्यप्) |
| महौषधीनाम् | महौषधी (६.३) |
| बभूवतुस्तत्र | बभूवतुः (√भू लिट् प्र.पु. द्वि.)–तत्र (अव्ययः) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| विशल्यावुत्तस्थुर् | विशल्य (१.२)–उत्तस्थुः (√उत्-स्था लिट् प्र.पु. बहु.) |
| अन्ये | अन्य (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| हरिप्रवीराः | हरि–प्रवीर (१.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | व | प्यु | भौ | मा | नु | ष | रा | ज | पु | त्रौ |
| तं | ग | न्ध | मा | घ्रा | य | म | हौ | ष | धी | नाम् |
| ब | भू | व | तु | स्त | त्र | त | दा | वि | श | ल्या |
| वु | त्त | स्थु | र | न्ये | च | ह | रि | प्र | वी | राः |