अन्वयः
रक्षसाम् Rakshasas, महत् great, तत् बलंपुनः again that army, जवेन speed, आफ्लुत्य moths, पतङ्गापावकम् fly towards flame, प्रत्यरिबलम् hostile army, प्रत्ययात् rushed.
Summary
The great army of Rakshasas rushed towards the hostile army just as moths flew up towards flame.
पदच्छेदः
| जवेनाप्लुत्य | जव (३.१)–आप्लुत्य (√आ-प्लु + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| पुनस्तद् | पुनर् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| राक्षसबलं | राक्षस–बल (२.१) |
| महत् | महत् (२.१) |
| अभ्ययात् | अभ्ययात् (√अभि-या लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रत्यरिबलं | प्रत्यरि–बल (२.१) |
| पतंग | पतंग (१.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| पावकम् | पावक (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ज | वे | ना | प्लु | त्य | च | पु | न |
| स्त | द्रा | क्ष | स | ब | लं | म | हत् |
| अ | भ्य | या | त्प्र | त्य | रि | ब | लं |
| प | तं | ग | इ | व | पा | व | कम् |