अन्वयः
तेषांराक्षसानाम् by the Rakshasas, भुजपरामर्शव्यामृष्टपरिघाशनि Clubs and Asanis brandished by rubbing with the arms, श्रेष्ठम् great, बलम् army, भूयः appeared, परम् very, अशोभत brightly.
Summary
Their Clubs and Asanis brandished by rubbing with their arms, the great army of Rakshasas appeared very bright.
पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| भुजपरामर्शव्यामृष्टपरिघाशनि | भुज–परामर्श–व्यामृष्ट (√व्या-मृज् + क्त)–परिघ–अशनि (१.१) |
| राक्षसानां | राक्षस (६.३) |
| बलं | बल (१.१) |
| श्रेष्ठं | श्रेष्ठ (१.१) |
| भूयस्तरम् | भूयस्तरम् (अव्ययः) |
| अशोभत | अशोभत (√शुभ् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षां | भु | ज | प | रा | म | र्श |
| व्या | मृ | ष्ट | प | रि | घा | श | नि |
| रा | क्ष | सा | नां | ब | लं | श्रे | ष्ठं |
| भू | य | स्त | र | म | शो | भ | त |