अन्वयः
सर्वरक्षसाम् all Rakshasas, पश्यताम् seeing, इन्द्रकेतुप्रतिमम् resembling Indra's banner, मन्दरसन्निभम् like the Mandara mountain, तंवृक्षम् that tree, वेगेन hurriedly, समुत्सृजन्तम् impatiently.
Summary
All the Rakshasas seeing the tall tree, which was like Mandara mountain, resembling Indra's banner hurriedly was about to let loose.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| इन्द्रकेतुप्रतिमं | इन्द्र–केतु–प्रतिम (२.१) |
| वृक्षं | वृक्ष (२.१) |
| मन्दरसंनिभम् | मन्दर–संनिभ (२.१) |
| समुत्सृजन्तं | समुत्सृजत् (√समुत्-सृज् + शतृ, २.१) |
| वेगेन | वेग (३.१) |
| पश्यतां | पश्यत् (√दृश् + शतृ, ६.३) |
| सर्वरक्षसाम् | सर्व–रक्षस् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मि | न्द्र | के | तु | प्र | ति | मं |
| वृ | क्षं | म | न्द | र | सं | नि | भम् |
| स | मु | त्सृ | ज | न्तं | वे | गे | न |
| प | श्य | तां | स | र्व | र | क्ष | साम् |