हतप्रवीरा व्यथिता राक्षसेन्द्रचमूस्तदा ।
जगामाभिमुखी सा तु कुम्भकर्णसुतो यतः ।
आपतन्तीं च वेगेन कुम्भस्तां सान्त्वयच्चमूम् ॥
हतप्रवीरा व्यथिता राक्षसेन्द्रचमूस्तदा ।
जगामाभिमुखी सा तु कुम्भकर्णसुतो यतः ।
आपतन्तीं च वेगेन कुम्भस्तां सान्त्वयच्चमूम् ॥
अन्वयः
तदा then, हतप्रवीरा heroes dead, सा many, राक्षसेन्द्रचमूः Rakshasa king's army, व्यथिता distressed, कुम्भकर्णसुतः son of Kumbhakarna, यतः like that, अभिमुखी went towards, जगाम went.M N Dutt
Thereupon the force of the lord of the Rāks asas, having its foremost heroes slain, and aggrieved thereat, went to where Kumbhakarma's son was.Summary
Then many heroes died, Rakshasa king's army was distressed and went towards where Kumbhakarna's son was fighting.पदच्छेदः
| हतप्रवीरा | हत (√हन् + क्त)–प्रवीर (१.१) |
| व्यथिता | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.१) |
| राक्षसेन्द्रचमूस्तदा | राक्षस–इन्द्र–चमू (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| जगामाभिमुखी | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.)–अभिमुख (१.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कुम्भकर्णसुतो | कुम्भकर्ण–सुत (१.१) |
| यतः | यतस् (अव्ययः) |
| आपतन्तीं | आपतत् (√आ-पत् + शतृ, २.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वेगेन | वेग (३.१) |
| कुम्भस्तां | कुम्भ (१.१)–तद् (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | त | प्र | वी | रा | व्य | थि | ता | रा | क्ष | से | न्द्र |
| च | मू | स्त | दा | ज | गा | मा | भि | मु | खी | सा | तु |
| कु | म्भ | क | र्ण | सु | तो | य | तः | आ | प | त | न्तीं |
| च | वे | गे | न | कु | म्भ | स्तां | सा | न्त्व | य | च्च | मूम् |