अन्वयः
सावमानेन slighted, तेन by the, सुग्रीवाक्येन Sugriva's words, मानितः flattered, राज्याहुतस्य royalty captivated, अग्नेःइव like fire, तस्य his, तेजः fire of energy, अभ्यवर्धत increased.
M N Dutt
Being thus honoured (by Sugrīva) with fair speech, (Kumbha) flamed up like a flame into which oblations have been poured.
Summary
Sugriva's words of flattering royalty captivated Kumbha's fire of energy, which doubled like fire fed with ghee.
पदच्छेदः
| तेन | तद् (३.१) |
| सुग्रीववाक्येन | सुग्रीव–वाक्य (३.१) |
| सावमानेन | स (अव्ययः)–अवमान (३.१) |
| मानितः | मानित (√मानय् + क्त, १.१) |
| अग्नेर् | अग्नि (६.१) |
| आज्यहुतस्येव | आज्य–हुत (√हु + क्त, ६.१)–इव (अव्ययः) |
| तेजस्तस्याभ्यवर्धत | तेजस् (१.१)–तद् (६.१)–अभ्यवर्धत (√अभि-वृध् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | न | सु | ग्री | व | वा | क्ये | न |
| सा | व | मा | ने | न | मा | नि | तः |
| अ | ग्ने | रा | ज्य | हु | त | स्ये | व |
| ते | ज | स्त | स्या | भ्य | व | र्ध | त |