दिष्ट्यासि दर्शनं राम मम त्वं प्राप्तवानिह ।
काङ्क्षितोऽसि क्षुधार्तस्य सिंहस्येवेतरो मृगः ॥
दिष्ट्यासि दर्शनं राम मम त्वं प्राप्तवानिह ।
काङ्क्षितोऽसि क्षुधार्तस्य सिंहस्येवेतरो मृगः ॥
अन्वयः
राम Rama, दिष्ट्या good fortune, त्वम् you, इह here, मम my, दर्शनम् seen, प्राप्तवान् became possible, क्षधार्तस्य hungry, सिंहस्य lion's, इह here, मृगःइव like animal, काङ्क्षितःwaiting for you, असि I amM N Dutt
O Rāma, by my good luck, I have got you today, like to a hungry lion desiring to have other animals.Summary
"Rama! To my good fortune it became possible for me to see you here. Just as a hungry lion waits for an animal, I am waiting for you."पदच्छेदः
| दिष्ट्यासि | दिष्टि (३.१)–असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| दर्शनं | दर्शन (२.१) |
| राम | राम (८.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| प्राप्तवान् | प्राप्तवत् (√प्र-आप् + क्तवतु, १.१) |
| इह | इह (अव्ययः) |
| काङ्क्षितो | काङ्क्षित (√काङ्क्ष् + क्त, १.१) |
| ऽसि | असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| क्षुधार्तस्य | क्षुधा–आर्त (६.१) |
| सिंहस्येवेतरो | सिंह (६.१)–इव (अव्ययः)–इतर (१.१) |
| मृगः | मृग (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | ष्ट्या | सि | द | र्श | नं | रा | म |
| म | म | त्वं | प्रा | प्त | वा | नि | ह |
| का | ङ्क्षि | तो | ऽसि | क्षु | धा | र्त | स्य |
| सिं | ह | स्ये | वे | त | रो | मृ | गः |