तद्दृष्ट्वा निहतं शूलं मकराक्षो निशाचरः ।
मुष्टिमुद्यम्य काकुत्स्थं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत् ॥
तद्दृष्ट्वा निहतं शूलं मकराक्षो निशाचरः ।
मुष्टिमुद्यम्य काकुत्स्थं तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत् ॥
अन्वयः
निशाचरः night ranger, मकराक्षःMakaraksha, तम् his, शूलम् pike, निहतम् destroyed, दृष्टवा seeing, मुष्टिम् fist, उद्यम्य lifting up, तिष्ठतिष्ठ wait wait, इति this, काकुत्स्थम् to Kakuthsa, अब्रवीत् spokeM N Dutt
Beholding his dart thus sundered, the nightranger Makarākșa clenching his fist spoke to Kakutstha, saying, "Stay! Stay!"Summary
The night ranger Makaraksha seeing his pike destroyed lifting up his fist said this to Kakuthsa, "Wait, wait."पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| निहतं | निहत (√नि-हन् + क्त, २.१) |
| शूलं | शूल (२.१) |
| मकराक्षो | मकराक्ष (१.१) |
| निशाचरः | निशाचर (१.१) |
| मुष्टिम् | मुष्टि (२.१) |
| उद्यम्य | उद्यम्य (√उत्-यम् + ल्यप्) |
| काकुत्स्थं | काकुत्स्थ (२.१) |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. ) |
| तिष्ठेति | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्दृ | ष्ट्वा | नि | ह | तं | शू | लं |
| म | क | रा | क्षो | नि | शा | च | रः |
| मु | ष्टि | मु | द्य | म्य | का | कु | त्स्थं |
| ति | ष्ठ | ति | ष्ठे | ति | चा | ब्र | वीत् |