तद्वानरबलं दृष्ट्वा रावणिः क्रोधमूर्छितः ।
कृत्वा विशोकं निस्त्रिंशं मूर्ध्नि सीतां परामृशत् ॥
तद्वानरबलं दृष्ट्वा रावणिः क्रोधमूर्छितः ।
कृत्वा विशोकं निस्त्रिंशं मूर्ध्नि सीतां परामृशत् ॥
अन्वयः
रावणिः Indrajith, तत् there, वानरबलम् Vanara army, दृष्टवा seeing, क्रोधमूर्छितः deluded with anger, निस्त्रिंशम् unsheathed, विकोशम् sword, कृत्वा did, सीताम् Sita, मूर्ध्नि forehead, अकर्षयत् touchedM N Dutt
Beholding that monkey host, Ravana's son became beside himself with ire and unsheathing his weapon Nistrinsha, caught her by the hair.Summary
Indrajith saw the Vanara army coming towards him, deluded with anger, unsheathed the sword and touched Sita's forehead.पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| वानरबलं | वानर–बल (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| रावणिः | रावणि (१.१) |
| क्रोधमूर्छितः | क्रोध–मूर्छित (√मूर्छय् + क्त, १.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| विकोशं | विकोश (२.१) |
| निस्त्रिंशं | निस्त्रिंश (२.१) |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| परामृशत् | परामृशत् (√परा-मृश् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्वा | न | र | ब | लं | दृ | ष्ट्वा |
| रा | व | णिः | क्रो | ध | मू | र्छि | तः |
| कृ | त्वा | वि | शो | कं | नि | स्त्रिं | शं |
| मू | र्ध्नि | सी | तां | प | रा | मृ | शत् |