गृहीतमूर्धजां दृष्ट्वा हनूमान्दैन्यमागतः ।
दुःखजं वारिनेत्राभ्यामुत्सृजन्मारुतात्मजः ।
अब्रवीत्परुषं वाक्यं क्रोधाद्रक्षोऽधिपात्मजम् ॥
गृहीतमूर्धजां दृष्ट्वा हनूमान्दैन्यमागतः ।
दुःखजं वारिनेत्राभ्यामुत्सृजन्मारुतात्मजः ।
अब्रवीत्परुषं वाक्यं क्रोधाद्रक्षोऽधिपात्मजम् ॥
अन्वयः
मारुतात्मजः Maruti's son, हनुमान् Hanuman, गृहीतमूर्धजाम् holding her head, दृष्टवा seeing, दैन्यम् piteously, आगतःdropped, नेत्राभ्याम् from his eyes, शोकजम् tears, वारि heroic, उत्सृजम् tears of sorrowM N Dutt
Seeing her thus caught by the head, Hanumān, the son of Maruta, greatly sorry, began to shed tears.Summary
Seeing Indrajith holding Sita's head, Maruti's son, was immersed in grief, and shed tears of sorrow from his eyes.पदच्छेदः
| गृहीतमूर्धजां | गृहीत (√ग्रह् + क्त)–मूर्धज (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| हनूमान् | हनुमन्त् (१.१) |
| दैन्यम् | दैन्य (२.१) |
| आगतः | आगत (√आ-गम् + क्त, १.१) |
| दुःखजं | दुःख–ज (२.१) |
| वारि | वारि (२.१) |
| नेत्राभ्याम् | नेत्र (५.२) |
| उत्सृजन्मारुतात्मजः | उत्सृजत् (√उत्-सृज् लङ् प्र.पु. एक.)–मारुतात्मज (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| परुषं | परुष (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| क्रोधाद् | क्रोध (५.१) |
| रक्षोऽधिपात्मजम् | रक्षस्–अधिप–आत्मज (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गृ | ही | त | मू | र्ध | जां | दृ | ष्ट्वा | ह | नू | मा | न्दै |
| न्य | मा | ग | तः | दुः | ख | जं | वा | रि | ने | त्रा | भ्या |
| मु | त्सृ | ज | न्मा | रु | ता | त्म | जः | अ | ब्र | वी | त्प |
| रु | षं | वा | क्यं | क्रो | धा | द्र | क्षो | ऽधि | पा | त्म | जम् |