पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| द्रुमांश्च | द्रुम (२.३)–च (अव्ययः) |
| महाकाया | महत्–काय (१.३) |
| गिरिशृङ्गाणि | गिरि–शृङ्ग (२.३) |
| चोद्यताः | च (अव्ययः)–उद्यत (√उत्-यम् + क्त, १.३) |
| चिक्षिपुर् | चिक्षिपुः (√क्षिप् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| द्विषतां | द्विषत् (√द्विष् + शतृ, ६.३) |
| मध्ये | मध्य (७.१) |
| वानरा | वानर (१.३) |
| भीमविक्रमाः | भीम–विक्रम (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | द्रु | मां | श्च | म | हा | का | या |
| गि | रि | शृ | ङ्गा | णि | चो | द्य | ताः |
| चि | क्षि | पु | र्द्वि | ष | तां | म | ध्ये |
| वा | न | रा | भी | म | वि | क्र | माः |