अन्वयः
इन्द्रजित् Indrajith, वानरार्दितम् tormented by Vanaras, स्वसैन्यम् his own army, अभिवीक्ष्य looking at, अथ and then, प्रगृहीतायुधः seizing weapons, क्रुद्धःangry, परान् enemies, अभिमुखःtowards, ययौwent
Summary
Indrajith, looking at his own army tormented by the Vanaras, was enraged, and went towards the enemies' seizing weapons.
पदच्छेदः
| स्वसैन्यम् | स्व–सैन्य (२.१) |
| अभिवीक्ष्याथ | अभिवीक्ष्य (√अभिवि-ईक्ष् + ल्यप्)–अथ (अव्ययः) |
| वानरार्दितम् | वानर–अर्दित (√अर्दय् + क्त, २.१) |
| इन्द्रजित् | इन्द्रजित् (१.१) |
| प्रगृहीतायुधः | प्रगृहीत (√प्र-ग्रह् + क्त)–आयुध (१.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| परान् | पर (२.३) |
| अभिमुखो | अभिमुख (१.१) |
| ययौ | ययौ (√या लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स्व | सै | न्य | म | भि | वी | क्ष्या | थ |
| वा | न | रा | र्दि | त | मि | न्द्र | जित् |
| प्र | गृ | ही | ता | यु | धः | क्रु | द्धः |
| प | रा | न | भि | मु | खो | य | यौ |