अन्वयः
दृष्टविक्रमः unyielding valour, सः he, स्वसैन्येन by his own army, अभिसम्वृतः combined with, शरौघान् arrows, अवसृजन् let go, सुबहून् numerous, कपिशार्दूलान् tigers among monkeys, जघान struck
Summary
Indrajith of unyielding valour, combining with his own army let go numerous arrows on the tigers of Vanaras and struck them.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| शरौघान् | शर–ओघ (२.३) |
| अवसृजन् | अवसृजत् (√अव-सृज् + शतृ, १.१) |
| स्वसैन्येनाभिसंवृतः | स्व–सैन्य (३.१)–अभिसंवृत (√अभिसम्-वृ + क्त, १.१) |
| जघान | जघान (√हन् लिट् प्र.पु. एक.) |
| कपिशार्दूलान् | कपि–शार्दूल (२.३) |
| सुबहून् | सु (अव्ययः)–बहु (२.३) |
| दृष्टविक्रमः | दृष्ट (√दृश् + क्त)–विक्रम (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | श | रौ | घा | न | व | सृ | ज |
| न्स्व | सै | न्ये | ना | भि | सं | वृ | तः |
| ज | घा | न | क | पि | शा | र्दू | ला |
| न्सु | ब | हू | न्दृ | ष्ट | वि | क्र | मः |