पदच्छेदः
| वानरान्मोहयित्वा | वानर (२.३)–मोहयित्वा (√मोहय् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| प्रतियातः | प्रतियात (√प्रति-या + क्त, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
| चैत्यं | चैत्य (२.१) |
| निकुम्भिलां | निकुम्भिल (२.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| होमं | होम (२.१) |
| करिष्यति | करिष्यति (√कृ लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वा | न | रा | न्मो | ह | यि | त्वा | तु |
| प्र | ति | या | तः | स | रा | क्ष | सः |
| चै | त्यं | नि | कु | म्भि | लां | ना | म |
| य | त्र | हो | मं | क | रि | ष्य | ति |