मनुजवर न कालविप्रकर्षो; रिपुनिधनं प्रति यत्क्षमोऽद्य कर्तुम् ।
त्वमतिसृज रिपोर्वधाय बाणी;मसुरपुरोन्मथने यथा महेन्द्रः ॥
मनुजवर न कालविप्रकर्षो; रिपुनिधनं प्रति यत्क्षमोऽद्य कर्तुम् ।
त्वमतिसृज रिपोर्वधाय बाणी;मसुरपुरोन्मथने यथा महेन्द्रः ॥
अन्वयः
मनुजवर jewel among men, रिपुमथनंप्रति in case of destruction of foes, अद्य now, कालविप्रकर्षः wasting time, कर्तुम् doing, यत् which, न क्षमः not desirable, दिविजरिपोःपधने enemy of gods, महेन्द्रःयथा like Lord of gods, रिपोः enemy, वधाय for killing, वाणीम् Ravana's son, अतिसृज commandM N Dutt
As today no time should be lost, therefore do you send Lakşmaņa for campassing the destruction of the foe, even as Mahendra send the thunder-bolt for bringing about the destruction of the enemies of the immortals.Summary
"O Jewel among men, wasting time in case of destruction of the enemy is not desirable. Just like the Lord of gods sent to kill the enemy of gods, you command Lakshmana to kill the enemy."पदच्छेदः
| मनुजवर | मनुज–वर (८.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| कालविप्रकर्षो | काल–विप्रकर्ष (१.१) |
| रिपुनिधनं | रिपु–निधन (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
| यत् | यत् (अव्ययः) |
| क्षमो | क्षम (१.१) |
| ऽद्य | अद्य (अव्ययः) |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अतिसृज | अतिसृज (√अति-सृज् लोट् म.पु. ) |
| रिपोर् | रिपु (६.१) |
| वधाय | वध (४.१) |
| वाणीम् | वाणी (२.१) |
| असुरपुरोन्मथने | असुर–पुर–उन्मथन (७.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| महेन्द्रः | महत्–इन्द्र (१.१) |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | नु | ज | व | र | न | का | ल | वि | प्र | क | र्षो | |
| रि | पु | नि | ध | नं | प्र | ति | य | त्क्ष | मो | ऽद्य | क | र्तुम् |
| त्व | म | ति | सृ | ज | रि | पो | र्व | धा | य | बा | णी | |
| म | सु | र | पु | रो | न्म | थ | ने | य | था | म | हे | न्द्रः |