अन्वयः
अद्यैव this day, महाचापगुणच्युताः loosed from mighty bow, मामकाः of mine, शराः arrows, रौद्रस्य fierce, तस्य his, शरीरम् body, भित्त्वा splitting, तम् him, विधमिष्यन्ति will kill
M N Dutt
This very day shall my arrows, shot from my redoubtable bow-string, rive the body of that terrific one.
Summary
"Today loosed from my mighty bow, the arrows will split his fierce body and kill him."
पदच्छेदः
| अद्यैव | अद्य (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| रौद्रस्य | रौद्र (६.१) |
| शरीरं | शरीर (२.१) |
| मामकाः | मामक (१.३) |
| शराः | शर (१.३) |
| विधमिष्यन्ति | विधमिष्यन्ति (√वि-धम् लृट् प्र.पु. बहु.) |
| हत्वा | हत्वा (√हन् + क्त्वा) |
| तं | तद् (२.१) |
| महाचापगुणच्युताः | महत्–चाप–गुण–च्युत (√च्यु + क्त, १.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | द्यै | व | त | स्य | रौ | द्र | स्य |
| श | री | रं | मा | म | काः | श | राः |
| वि | ध | मि | ष्य | न्ति | ह | त्वा | तं |
| म | हा | चा | प | गु | ण | च्यु | ताः |