अन्वयः
राक्षसानाम् at Rakshasas, सहस्राणि thousands, तरसा at great speed, विध्वंसयन्तम् destroying, पवनात्मजम् WindGod's son, दृष्टवैव seeing, अवाकिरन् surrounded
M N Dutt
Finding the Wind-god's son, Hanumān, suddenly spreading devastation among the Rāks asas by thousands, (they) showered (shafts) on him.
Summary
Seeing the wind god's son destroying, thousands of Rakshasas got together surrounding him.
पदच्छेदः
| विध्वंसयन्तं | विध्वंसयत् (√वि-ध्वंसय् + शतृ, २.१) |
| तरसा | तरस् (३.१) |
| दृष्ट्वैव | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा)–एव (अव्ययः) |
| पवनात्मजम् | पवनात्मज (२.१) |
| राक्षसानां | राक्षस (६.३) |
| सहस्राणि | सहस्र (१.३) |
| हनूमन्तम् | हनुमन्त् (२.१) |
| अवाकिरन् | अवाकिरन् (√अव-कृ लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| वि | ध्वं | स | य | न्तं | त | र | सा |
| दृ | ष्ट्वै | व | प | व | ना | त्म | जम् |
| रा | क्ष | सा | नां | स | ह | स्रा | णि |
| ह | नू | म | न्त | म | वा | कि | रन् |