निदर्शयस्वात्मबलं समुद्यतं; कुरुष्व सर्वायुधसायकव्ययम् ।
न लक्ष्मणस्यैत्य हि बाणगोचरं; त्वमद्य जीवन्सबलो गमिष्यसि ॥
निदर्शयस्वात्मबलं समुद्यतं; कुरुष्व सर्वायुधसायकव्ययम् ।
न लक्ष्मणस्यैत्य हि बाणगोचरं; त्वमद्य जीवन्सबलो गमिष्यसि ॥
M N Dutt
Displaying you own prowess, do you spend all your weapons and all your shafts. But coming within the ken of Laksmana's arrows, your will not today go hence, living with your forces.पदच्छेदः
| निदर्शयस्वात्मबलं | निदर्शयस्व (√नि-दर्शय् लोट् म.पु. )–आत्मन्–बल (२.१) |
| समुद्यतं | समुद्यत (√समुत्-यम् + क्त, २.१) |
| कुरुष्व | कुरुष्व (√कृ लोट् म.पु. ) |
| सर्वायुधसायकव्ययम् | सर्व–आयुध–सायक–व्यय (२.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| लक्ष्मणस्यैत्य | लक्ष्मण (६.१)–एत्य (√आ-इ + ल्यप्) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| बाणगोचरं | बाण–गोचर (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| जीवन् | जीवत् (√जीव् + शतृ, १.१) |
| सबलो | स (अव्ययः)–बल (१.१) |
| गमिष्यसि | गमिष्यसि (√गम् लृट् म.पु. ) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | द | र्श | य | स्वा | त्म | ब | लं | स | मु | द्य | तं |
| कु | रु | ष्व | स | र्वा | यु | ध | सा | य | क | व्य | यम् |
| न | ल | क्ष्म | ण | स्यै | त्य | हि | बा | ण | गो | च | रं |
| त्व | म | द्य | जी | व | न्स | ब | लो | ग | मि | ष्य | सि |
| ज | त | ज | र | ||||||||