अन्वयः
महातेजाः brilliant, मित्रनन्दनः delight of friends, सौमित्रिः Saumithri, तथेति like that, उक्त्वा spoken, चित्रम् wonderful, धनुः bow, विस्फारयन् twanging, तत्र there, अवस्थितः stood, बभूव remained
M N Dutt
Thereupon saying, 'So be it,' the exceedingly energetic son of Sumitrā-that delight of his friends, took up his post there stretching his variegated bow.
Summary
Brilliant Saumithri, delighted by his friends, twanging his wonderful bow stood there, after Vibheeshana had spoken to him.
पदच्छेदः
| तथेत्युक्त्वा | तथा (अव्ययः)–इति (अव्ययः)–उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| महातेजाः | महत्–तेजस् (१.१) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| मित्रनन्दनः | मित्र–नन्दन (१.१) |
| बभूवावस्थितस्तत्र | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.)–अवस्थित (√अव-स्था + क्त, १.१)–तत्र (अव्ययः) |
| चित्रं | चित्र (२.१) |
| विस्फारयन् | विस्फारयत् (√वि-स्फारय् + शतृ, १.१) |
| धनुः | धनुस् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | थे | त्यु | क्त्वा | म | हा | ते | जाः |
| सौ | मि | त्रि | र्मि | त्र | न | न्द | नः |
| ब | भू | वा | व | स्थि | त | स्त | त्र |
| चि | त्रं | वि | स्फा | र | य | न्ध | नुः |