अन्वयः
राक्षस Rakshasa, तव your, बाणपथम् range of arrows, प्राप्य reaching, यथा there, स्थितः stood अस्मि me, तत् that, तेजः power, अद्य now, दर्शयस्व show, त्वम् you, वाचा spoke, किम् why, विकत्थसे boasting
M N Dutt
Coming within the range of your shafts, I stay here, do you display your prowess. What did you say in words.?
Summary
"Rakshasa! I have reached your range of arrows and stand before you. Show that power now about which you boasted."
पदच्छेदः
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| बाणपथं | बाण–पथ (२.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| स्थितो | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| राक्षस | राक्षस (८.१) |
| दर्शयस्वाद्य | दर्शयस्व (√दर्शय् लोट् म.पु. )–अद्य (अव्ययः) |
| तत् | तद् (२.१) |
| तेजो | तेजस् (२.१) |
| वाचा | वाच् (३.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| किं | क (२.१) |
| विकत्थसे | विकत्थसे (√वि-कत्थ् लट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | था | बा | ण | प | थं | प्रा | प्य |
| स्थि | तो | ऽहं | त | व | रा | क्ष | स |
| द | र्श | य | स्वा | द्य | त | त्ते | जो |
| वा | चा | त्वं | किं | वि | क | त्थ | से |