अन्वयः
राक्षस Rakshasa, कर्म action, अकृत्वा without performing, किमर्थम् What is the use, कत्थसे praising yourself, येन by that, अहम् I, तव your, कत्थनम् by praising, श्रद्धध्याम् create trust, तत् that, कर्म action, कुरु show that
M N Dutt
Why, O Raksasa, without doing (what you say), did you simply say it? Do the deed, so that I may have regard for your utterances.
Summary
Rakshasa! What is the use of praising without performing action? Show by action and create trust that you can perform.
पदच्छेदः
| अकृत्वा | अकृत्वा (अव्ययः) |
| कत्थसे | कत्थसे (√कत्थ् लट् म.पु. ) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| किमर्थम् | क (२.१)–अर्थ (२.१) |
| इह | इह (अव्ययः) |
| राक्षस | राक्षस (८.१) |
| कुरु | कुरु (√कृ लोट् म.पु. ) |
| तत् | तद् (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| येनाहं | यद् (३.१)–मद् (१.१) |
| श्रद्दध्यां | श्रद्दध्याम् (√श्रद्-धा विधिलिङ् उ.पु. ) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| कत्थनम् | कत्थन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | कृ | त्वा | क | त्थ | से | क | र्म |
| कि | म | र्थ | मि | ह | रा | क्ष | स |
| कु | रु | त | त्क | र्म | ये | ना | हं |
| श्र | द्द | ध्यां | त | व | क | त्थ | नम् |