अन्वयः
तदा then, लक्ष्मण: Lakshmana, राक्षसेन्द्रस्य Indrajith's words, तत् that, गर्जितम् roaring, श्रुत्वा hearing, अभीतवदनः fearless countenance, क्रुद्धः angry, रावणिम् Indrajith, वाक्यम् these words, अब्रवीत् spoken
M N Dutt
Hearing the vaunt of the Rākşasa-chief, Rahgu's son, inflamed with rage, with an undaunted countenance, spoke to Ravana's son.
Summary
On hearing Indrajith's words, Lakshmana spoke these words in anger with fearless countenance.
पदच्छेदः
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| राक्षसेन्द्रस्य | राक्षस–इन्द्र (६.१) |
| गर्जितं | गर्जित (२.१) |
| लक्ष्मणस्तदा | लक्ष्मण (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| अभीतवदनः | अभीत–वदन (१.१) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| रावणिं | रावणि (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | च्छ्रु | त्वा | रा | क्ष | से | न्द्र | स्य |
| ग | र्जि | तं | ल | क्ष्म | ण | स्त | दा |
| अ | भी | त | व | द | नः | क्रु | द्धो |
| रा | व | णिं | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |