अन्वयः
समरे in war, जयकाङ्क्षिणः seeking victory, शूराः heroes, एवम् in that way, न युध्यन्ते not fight, इत्येवम् this way, ब्रुवाणस्तु speaking, धन्वी bow, शरैः arrows, अभिववर्ष ह rained arrows
M N Dutt
Speaking thus, (Laksmana) accoutred with his bow showered vollies of shafts (on his adversary).
Summary
"Heroes seeking victory in that way do not fight". Thus speaking, Lakshmana rained arrows.
पदच्छेदः
| नैवं | न (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| शूरास्तु | शूर (१.३)–तु (अव्ययः) |
| युध्यन्ते | युध्यन्ते (√युध् लट् प्र.पु. बहु.) |
| समरे | समर (७.१) |
| जयकाङ्क्षिणः | जय–काङ्क्षिन् (१.३) |
| इत्येवं | इति (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| ब्रुवाणस्तु | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, १.१)–तु (अव्ययः) |
| शरवर्षैर् | शर–वर्ष (३.३) |
| अवाकिरत् | अवाकिरत् (√अव-कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नै | वं | शू | रा | स्तु | यु | ध्य | न्ते |
| स | म | रे | ज | य | का | ङ्क्षि | णः |
| इ | त्ये | वं | तं | ब्रु | वा | ण | स्तु |
| श | र | व | र्षै | र | वा | कि | रत् |