अन्वयः
इन्द्रजित् Indrajith, लक्ष्मणश्चैव and also Lakshmana, परस्परवधैषिणौ, मुहुर्मुहुः again and again, तुमुलम् tumultous, घोरम् dreadful, सन्निपातम् struggle, चक्रतुः carried out
M N Dutt
Each eager to vanquish the other, Indrajit and Lakşmaņa momentarily discharged tremendous and terrific showers (of arms).
Summary
Indrajith and Lakshmana again and again carried out tumultuous and dreadful struggle.
पदच्छेदः
| चक्रतुस्तुमुलं | चक्रतुः (√कृ लिट् प्र.पु. द्वि.)–तुमुल (२.१) |
| घोरं | घोर (२.१) |
| संनिपातं | संनिपात (२.१) |
| मुहुर् | मुहुर् (अव्ययः) |
| मुहुः | मुहुर् (अव्ययः) |
| इन्द्रजिल् | इन्द्रजित् (१.१) |
| लक्ष्मणश्चैव | लक्ष्मण (१.१)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| परस्परजयैषिणौ | परस्पर–जय–एषिन् (१.२) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| च | क्र | तु | स्तु | मु | लं | घो | रं |
| सं | नि | पा | तं | मु | हु | र्मु | हुः |
| इ | न्द्र | जि | ल्ल | क्ष्म | ण | श्चै | व |
| प | र | स्प | र | ज | यै | षि | णौ |