अन्वयः
सः heIndarjith, परम् very, लाघवम् easily, आश्रितः aimed, लक्ष्मणम् at Lakshmana, उद्धिव्य let loose, पुरन्दरः Purandara (destroyer of citadel), वर्षाणीव raining, शरवर्षाणि rain of arrows, ववर्ष rained
M N Dutt
Then aiming at Lakşmaņa, he, summoning his utmost celerity, showered arrows, as shower Purandara in the season of rains.
Summary
Indrajith, aiming at Lakshmana, let loose rain of arrows easily like rain.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| लक्ष्मणं | लक्ष्मण (२.१) |
| समुद्दिश्य | समुद्दिश्य (√समुत्-दिश् + ल्यप्) |
| परं | पर (२.१) |
| लाघवम् | लाघव (२.१) |
| आस्थितः | आस्थित (√आ-स्था + क्त, १.१) |
| ववर्ष | ववर्ष (√वृष् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शरवर्षाणि | शर–वर्ष (२.३) |
| वर्षाणीव | वर्ष (२.३)–इव (अव्ययः) |
| पुरंदरः | पुरंदर (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ल | क्ष्म | णं | स | मु | द्दि | श्य |
| प | रं | ला | घ | व | मा | स्थि | तः |
| व | व | र्ष | श | र | व | र्षा | णि |
| व | र्षा | णी | व | पु | रं | द | रः |