अन्वयः
हतम् killed, रणक्षितौ fallen on the ground, शयानम् lying, इन्द्रजितम् Indrajith, दृष्टवा seeing, राक्षसानाम् Rakshasas, सहस्रेषु thousands, कश्चित् indeed, न प्रत्यदृश्यत not present there
M N Dutt
Seeing Indrajit slain and lying down on the field of battle, thousands of Raksasas fled away.
Summary
Indrajith was lying, having fallen on the ground, and not even one of the thousands of Rakshasas was present there to see.
पदच्छेदः
| हतम् | हत (√हन् + क्त, २.१) |
| इन्द्रजितं | इन्द्रजित् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| शयानं | शयान (√शी + शानच्, २.१) |
| समरक्षितौ | समर–क्षिति (७.१) |
| राक्षसानां | राक्षस (६.३) |
| सहस्रेषु | सहस्र (७.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| कश्चित् | कश्चित् (१.१) |
| प्रत्यदृश्यत | प्रत्यदृश्यत (√प्रति-दृश् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ह | त | मि | न्द्र | जि | तं | दृ | ष्ट्वा |
| श | या | नं | स | म | र | क्षि | तौ |
| रा | क्ष | सा | नां | स | ह | स्रे | षु |
| न | क | श्चि | त्प्र | त्य | दृ | श्य | त |