अन्वयः
सर्वलोकभयावहे terror for all worlds, तस्मिन् his, पतिते fall, आपः water, नभश्चैव from the sky, शुद्धाः pure, देवदानवाःDevas and Danavas, जह्रषुः rejoiced, आजग्मुः came there
Summary
As the terror of all worlds had fallen and the water from the sky became pure, Devas and Danavas rejoiced and came there.
पदच्छेदः
| शुद्धा | शुद्ध (√शुध् + क्त, १.३) |
| आपो | अप् (१.३) |
| नभश्चैव | नभस् (१.१)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| जहृषुर् | जहृषुः (√हृष् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| दैत्यदानवाः | दैत्य–दानव (१.३) |
| आजग्मुः | आजग्मुः (√आ-गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| पतिते | पतित (√पत् + क्त, ७.१) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| सर्वलोकभयावहे | सर्व–लोक–भय–आवह (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| शु | द्धा | आ | पो | न | भ | श्चै | व |
| ज | हृ | षु | र्दै | त्य | दा | न | वाः |
| आ | ज | ग्मुः | प | ति | ते | त | स्मि |
| न्स | र्व | लो | क | भ | या | व | हे |