तथैव रामः प्लवगाधिपस्तदा; विभीषणश्चर्क्षपतिश्च जाम्बवान् ।
अवेक्ष्य सौमित्रिमरोगमुत्थितं; मुदा ससैन्यः सुचिरं जहर्षिरे ॥
तथैव रामः प्लवगाधिपस्तदा; विभीषणश्चर्क्षपतिश्च जाम्बवान् ।
अवेक्ष्य सौमित्रिमरोगमुत्थितं; मुदा ससैन्यः सुचिरं जहर्षिरे ॥
अन्वयः
तदैव at that time, रामः Rama, तथा so also, प्लवगाधिपः monkey leader, विभीषणश्च at Vibheeshana, जाम्बवान् Jambavan, क्षपतिश्च with their, ससैन्याः with army, आरोगम् free from wounds, उथतितम् getting up, सौमित्रिम् Saumithri, आवेक्ष्य seeing, सुचिरम् long time, जहर्षिरे full of joyM N Dutt
Rāma and the monkey-king and Vibhīşaņa! and the powerful lord of bears along with their hosts, seeing Sumitrā's son risen hale, rejoiced greatly in delight.Summary
At that time, Rama, also the monkey leader, and Vibheeshana, Jambavan with their army seeing Lakshmana getting up, free from wounds were full of joy.पदच्छेदः
| तथैव | तथा (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| रामः | राम (१.१) |
| प्लवगाधिपस्तदा | प्लवग–अधिप (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| विभीषणश्चर्क्षपतिश्च | विभीषण (१.१)–च (अव्ययः)–ऋक्ष–पति (१.१)–च (अव्ययः) |
| जाम्बवान् | जाम्बवन्त् (१.१) |
| अवेक्ष्य | अवेक्ष्य (√अव-ईक्ष् + ल्यप्) |
| सौमित्रिम् | सौमित्रि (२.१) |
| अरोगम् | अरोग (२.१) |
| उत्थितं | उत्थित (√उत्-स्था + क्त, २.१) |
| मुदा | मुद् (३.१) |
| ससैन्यः | स (अव्ययः)–सैन्य (१.१) |
| सुचिरं | सु (अव्ययः)–चिरम् (अव्ययः) |
| जहर्षिरे | जहर्षिरे (√हृष् लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | थै | व | रा | मः | प्ल | व | गा | धि | प | स्त | दा |
| वि | भी | ष | ण | श्च | र्क्ष | प | ति | श्च | जा | म्ब | वान् |
| अ | वे | क्ष्य | सौ | मि | त्रि | म | रो | ग | मु | त्थि | तं |
| मु | दा | स | सै | न्यः | सु | चि | रं | ज | ह | र्षि | रे |
| ज | त | ज | र | ||||||||