अन्वयः
ततः then, पर्वतोपमः one of mountain like form, वज्रहनुर्नाम Vajrahanu, राक्षसः Rakshasa, क्रुद्ध: angry, जिह्वया: with tongue, सृक्काम् lips, परिलिहन् licking, वाक्यम् these words, अब्रवीत् said.
M N Dutt
Then a Raksasa, named Vajrahanu, resembling a hill, in wrath lapping the corners of his mouth with his tongue, said.
Summary
Then a Rakshasa called Vajrahanu, mountain like in form, enraged, licking lips with his tongue said these words.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वज्रहनुर् | वज्रहनु (१.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
| पर्वतोपमः | पर्वत–उपम (१.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| परिलिहन् | परिलिहत् (√परि-लिह् + शतृ, १.१) |
| वक्त्रं | वक्त्र (२.१) |
| जिह्वया | जिह्वा (३.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | व | ज्र | ह | नु | र्ना | म |
| रा | क्ष | सः | प | र्व | तो | प | मः |
| क्रु | द्धः | प | रि | लि | ह | न्व | क्त्रं |
| जि | ह्व | या | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |