अन्वयः
अद्य today, अन्तःपुरे in the gynaecium, नैरृतकन्यानाम् Rakshasa maidens, रवम् cries, गिरिगह्वरे in the caves, करेणुसङ्घस्य like elephants, निनादंयथा roaring like, श्रोष्यामि will hear
M N Dutt
To-day shall I hear the cries of the daughters of the Naiſtas in my inner apartment, like to the roars of she-elephants in a mountain-cavern.
Summary
'Today in the gynaecium we will hear the cries of Rakshasa maidens like the roaring of elephants in the cave'.
पदच्छेदः
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| नैरृतकन्यानां | नैरृत–कन्या (६.३) |
| श्रोष्याम्यन्तःपुरे | श्रोष्यामि (√श्रु लृट् उ.पु. )–अन्तःपुर (७.१) |
| रवम् | रव (२.१) |
| करेणुसंघस्य | करेणु–संघ (६.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| निनादं | निनाद (२.१) |
| गिरिगह्वरे | गिरि–गह्वर (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | द्य | नै | रृ | त | क | न्या | यां |
| श्रो | ष्या | म्य | न्तः | पु | रे | र | वम् |
| क | रे | णु | सं | घ | स्य | य | था |
| नि | ना | दं | गि | रि | ग | ह्व | रे |