अन्वयः
सःवानरः that Vanara, तस्यविरूपाक्षस्य that Virupaksha's, अन्तरम् blow, ददर्श seeing, ततः thereafter, क्रोधात् angered, अन्यत् other, महात्तलम् big palm, शङ्खदेशे on the temporal bone, पातयत् fell
Summary
The Vanara, seeing the blow given by Virupaksha, enraged Sugriva hit him with another palm on the temporal bone by which he fell.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| ददर्शान्तरं | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.)–अन्तर (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| विरूपाक्षस्य | विरूपाक्ष (६.१) |
| वानरः | वानर (१.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| न्यपातयत् | न्यपातयत् (√नि-पातय् लङ् प्र.पु. एक.) |
| क्रोधाच्छङ्खदेशे | क्रोध (५.१)–शङ्ख–देश (७.१) |
| महातलम् | महत्–तल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | द | द | र्शा | न्त | रं | त | स्य |
| वि | रू | पा | क्ष | स्य | वा | न | रः |
| त | तो | न्य | पा | त | य | त्क्रो | धा |
| च्छ | ङ्ख | दे | शे | म | हा | त | लम् |