अन्वयः
राक्षसेश्वरः king of Rakshasas, सःरावणः he, Ravana, राघवम् Raghava, समासाद्य coming near, क्रोधसंरक्तलोचनः angry looks in the eyes, शरवर्षाणि rained arrows, व्यसृजत् showered
M N Dutt
Approaching Rāghava, Rāvana the lord of Rakşasas, with his eyes reddened in ire, began to make a shower of arrows.
Summary
Ravana the king of Rakshasas coming near Raghava with angry looks in his eyes, showered rain of arrows at Rama.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| संख्ये | संख्य (७.१) |
| रामम् | राम (२.१) |
| आसाद्य | आसाद्य (√आ-सादय् + ल्यप्) |
| क्रोधसंरक्तलोचनः | क्रोध–संरक्त (√सम्-रञ्ज् + क्त)–लोचन (१.१) |
| व्यसृजच्छरवर्षानि | व्यसृजत् (√वि-सृज् लङ् प्र.पु. एक.)–शर–वर्ष (२.३) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| राघवोपरि | राघव–उपरि (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | सं | ख्ये | रा | म | मा | सा | द्य |
| क्रो | ध | सं | र | क्त | लो | च | नः |
| व्य | सृ | ज | च्छ | र | व | र्षा | नि |
| रा | व | णो | रा | घ | वो | प | रि |