अन्वयः
महात्मनः great soul, राघवस्य Raghava's, इत्येवम् in this manner, वदतः spoken, भिन्नः broken, लक्ष्मणः Lakshmana, शिथिलया irresolute, वाचा talk, वाक्यम् words, अब्रवीत् spoke
M N Dutt
When the high-souled Raghava had spoken thus, Lakşmaņa, aggrieved on account of the words (of Rāghava) expressive of infirmity of purpose, said.
Summary
When Raghava had spoken in that manner, Lakshmana spoke, pained by the irresolute talk (of Rama).
पदच्छेदः
| इत्येवं | इति (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| वदतस्तस्य | वदत् (√वद् + शतृ, ६.१)–तद् (६.१) |
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| खिन्नः | खिन्न (√खिद् + क्त, १.१) |
| शिथिलया | शिथिल (३.१) |
| वाचा | वाच् (३.१) |
| लक्ष्मणो | लक्ष्मण (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्ये | वं | व | द | त | स्त | स्य |
| रा | घ | व | स्य | म | हा | त्म | नः |
| खि | न्नः | शि | थि | ल | या | वा | चा |
| ल | क्ष्म | णो | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |