लज्जतीव हि मे वीर्यं भ्रश्यतीव कराद्धनुः ।
सायका व्यवसीदन्ति दृष्टिर्बाष्पवशं गता ।
चिन्ता मे वर्धते तीव्रा मुमूर्षा चोपजायते ॥
लज्जतीव हि मे वीर्यं भ्रश्यतीव कराद्धनुः ।
सायका व्यवसीदन्ति दृष्टिर्बाष्पवशं गता ।
चिन्ता मे वर्धते तीव्रा मुमूर्षा चोपजायते ॥
अन्वयः
वीर्यम् heroism, लज्जतीव shy, धनुः bow, करात् from hand, भ्रश्यतीव slip from, सायकाः arrows, व्यवसीदन्ति dropping, दृष्टिः vision, बाष्पवशम् filled with tears, गताहि goneM N Dutt
My prowess is ashamed; my bow fall off from my hand; my arrows droop; my sight is dimmed with tears; my limbs weaken as do those of men in a dream; thought racks me; and I even desire death.Summary
'My heroism is shy, my bow slips from my hand, arrows are dropping, my vision is blurred with tears with my brother gone.'पदच्छेदः
| लज्जतीव | लज्जति (√लज्ज् लट् प्र.पु. एक.)–इव (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| वीर्यं | वीर्य (१.१) |
| भ्रश्यतीव | भ्रश्यति (√भ्रंश् लट् प्र.पु. एक.)–इव (अव्ययः) |
| कराद् | कर (५.१) |
| धनुः | धनुस् (१.१) |
| सायका | सायक (१.३) |
| व्यवसीदन्ति | व्यवसीदन्ति (√व्यव-सद् लट् प्र.पु. बहु.) |
| दृष्टिर् | दृष्टि (१.१) |
| बाष्पवशं | बाष्प–वश (२.१) |
| गता | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| चिन्ता | चिन्ता (१.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| वर्धते | वर्धते (√वृध् लट् प्र.पु. एक.) |
| तीव्रा | तीव्र (१.१) |
| मुमूर्षा | मुमूर्षा (१.१) |
| चोपजायते | च (अव्ययः)–उपजायते (√उप-जन् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | ज्ज | ती | व | हि | मे | वी | र्यं | भ्र | श्य | ती | व |
| क | रा | द्ध | नुः | सा | य | का | व्य | व | सी | द | न्ति |
| दृ | ष्टि | र्बा | ष्प | व | शं | ग | ता | चि | न्ता | मे | व |
| र्ध | ते | ती | व्रा | मु | मू | र्षा | चो | प | जा | य | ते |