तान्गृहीतायुधान्सर्वान्वारयित्वा विभीषणः ।
अब्रवीत्प्राञ्जलिर्वाक्यं पुनः प्रत्युपवेश्य तान् ॥
तान्गृहीतायुधान्सर्वान्वारयित्वा विभीषणः ।
अब्रवीत्प्राञ्जलिर्वाक्यं पुनः प्रत्युपवेश्य तान् ॥
अन्वयः
विभीषणः Vibheeshana, गृहीतायुधान् wielding arms, तान् सर्वान् all those, वारयित्वा: stopping, तान् those, प्रत्युपवेश्य: and making them sit, प्राञ्जलिः with folded palms, वाक्यम् these words, अब्रवीत् addressed.M N Dutt
Then, preventing them, who had (thus) equipped themselves with all kinds of weapons, and making them sit down, Vibhisana, with joined hands, again spoke to them, saying.Summary
With folded hands, Vibheeshana made all the (Rakshasas) wielding arms to stop and sit and addressed these words to Ravana.पदच्छेदः
| तान् | तद् (२.३) |
| गृहीतायुधान् | गृहीत (√ग्रह् + क्त)–आयुध (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| वारयित्वा | वारयित्वा (√वारय् + क्त्वा) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्राञ्जलिर् | प्राञ्जलि (१.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| प्रत्युपवेश्य | प्रत्युपवेश्य (√प्रत्युप-वेशय् + ल्यप्) |
| तान् | तद् (२.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | न्गृ | ही | ता | यु | धा | न्स | र्वा |
| न्वा | र | यि | त्वा | वि | भी | ष | णः |
| अ | ब्र | वी | त्प्रा | ञ्ज | लि | र्वा | क्यं |
| पु | नः | प्र | त्यु | प | वे | श्य | तान् |