M N Dutt
Then the enraged Rāma with his eyes slightly red flew into a tremendous passion as if burning up the Rākşasas.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| भ्रुकुटीं | भ्रुकुटि (२.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| किंचित् | कश्चित् (२.१) |
| संरक्तलोचनः | संरक्त (√सम्-रञ्ज् + क्त)–लोचन (१.१) |
| जगाम | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुमहाक्रोधं | सु (अव्ययः)–महत्–क्रोध (२.१) |
| निर्दहन्न् | निर्दहत् (√निः-दह् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| चक्षुषा | चक्षुस् (३.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | कृ | त्वा | भ्रु | कु | टीं | क्रु | द्धः |
| किं | चि | त्सं | र | क्त | लो | च | नः |
| ज | गा | म | सु | म | हा | क्रो | धं |
| नि | र्द | ह | न्नि | व | च | क्षु | षा |