अन्वयः
रघुनन्दनः enhancer of joy of Raghus, सः he, राघवः Raghava, परमक्रुद्धः very angry, मातलिना Matali, आनीताम् brought by, वासवसम्मताम् built by esteemed Indra, तांशक्तिम् that javelin, जग्राह raised
M N Dutt
Then waxing wondrous wroth, Raghu's sonRāghava-took up a javelin, liked by Vāsava himself, brought by Matali.
Summary
Raghava, the enhancer of the joy of Raghus, lifted up the javelin brought by Matali, esteemed by Indra.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तां | तद् (२.१) |
| मातलिनानीतां | मातलि (३.१)–आनीत (√आ-नी + क्त, २.१) |
| शक्तिं | शक्ति (२.१) |
| वासवनिर्मिताम् | वासव–निर्मित (√निः-मा + क्त, २.१) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| परमक्रुद्धो | परम–क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| राघवो | राघव (१.१) |
| रघुनन्दनः | रघुनन्दन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | तां | मा | त | लि | ना | नी | तां |
| श | क्तिं | वा | स | व | नि | र्मि | ताम् |
| ज | ग्रा | ह | प | र | म | क्रु | द्धो |
| रा | घ | वो | र | घु | न | न्द | नः |