अन्वयः
ततः thereafter, क्षिप्रहस्तः quickhanded, निशाचरः night ranger, क्रुद्धः angry, महात्मनः great soul, राघवस्य Raghava's, उरसि chest, शरसहस्राणि thousands of arrows, निजघान struck
M N Dutt
Then the fleet-handed night-ranger, fired with rage, discharged a thousand arrows at the chest of the high souled Raghava.
Summary
Thereafter the quickhanded angry night ranger struck into the chest of Raghava thousands of arrows.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| शरसहस्राणि | शर–सहस्र (२.३) |
| क्षिप्रहस्तो | क्षिप्र–हस्त (१.१) |
| निशाचरः | निशाचर (१.१) |
| निजघानोरसि | निजघान (√नि-हन् लिट् प्र.पु. एक.)–उरस् (७.१) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | श | र | स | ह | स्रा | णि |
| क्षि | प्र | ह | स्तो | नि | शा | च | रः |
| नि | ज | घा | नो | र | सि | क्रु | द्धो |
| रा | घ | व | स्य | म | हा | त्म | नः |