पदच्छेदः
| ध्वजस्योन्मथनं | ध्वज (६.१)–उन्मथन (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| रावणः | रावण (१.१) |
| सुमहाबलः | सु (अव्ययः)–महत्–बल (१.१) |
| क्रोधजेनाग्निना | क्रोध–ज (३.१)–अग्नि (३.१) |
| संख्ये | संख्य (७.१) |
| प्रदीप्त | प्रदीप्त (√प्र-दीप् + क्त, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| चाभवत् | च (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ध्व | ज | स्यो | न्म | थ | नं | दृ | ष्ट्वा |
| रा | व | णः | सु | म | हा | ब | लः |
| क्रो | ध | जे | ना | ग्नि | ना | सं | ख्ये |
| प्र | दी | प्त | इ | व | चा | भ | वत् |