विमुच्य राघवरथं समन्ताद्वानरे बले ।
सायकैरन्तरिक्षं च चकाराशु निरन्तरम् ।
मुमोच च दशग्रीवो निःसङ्गेनान्तरात्मना ॥
विमुच्य राघवरथं समन्ताद्वानरे बले ।
सायकैरन्तरिक्षं च चकाराशु निरन्तरम् ।
मुमोच च दशग्रीवो निःसङ्गेनान्तरात्मना ॥
अन्वयः
राघवरथम् Raghava's chariot, विमुच्य obstructed by, समन्तात् on all sides, वानरे Vanaras, बले army, सायकैः arrows, अन्तरिक्षम् into the sky, सुनिरन्तरम् on the army, चकार coveredM N Dutt
Thereupon leaving aside Rāghava's car he began to assail the monkey-host and enveloped the sky with a continual discharge of arrows. The Ten-necked demon let loose many a weapon even at the risk of his own life.Summary
Obstructed by Raghava's chariot on all sides, the arrows covered the Vanara army and up to the sky.पदच्छेदः
| विमुच्य | विमुच्य (√वि-मुच् + ल्यप्) |
| राघवरथं | राघव–रथ (२.१) |
| समन्ताद् | समन्तात् (अव्ययः) |
| वानरे | वानर (७.१) |
| बले | बल (७.१) |
| सायकैर् | सायक (३.३) |
| अन्तरिक्षं | अन्तरिक्ष (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| चकाराशु | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.)–आशु (अव्ययः) |
| निरन्तरम् | निरन्तर (२.१) |
| मुमोच | मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| दशग्रीवो | दशग्रीव (१.१) |
| निःसङ्गेनान्तरात्मना | निःसङ्ग (३.१)–अन्तरात्मन् (३.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | मु | च्य | रा | घ | व | र | थं | स | म | न्ता | द्वा |
| न | रे | ब | ले | सा | य | कै | र | न्त | रि | क्षं | च |
| च | का | रा | शु | नि | र | न्त | रम् | मु | मो | च | च |
| द | श | ग्री | वो | निः | स | ङ्गे | ना | न्त | रा | त्म | ना |