अन्वयः
शरजालानि network of arrows, क्षिपतोः released, तयोः by both, स्यन्दनोत्तमौ excellent warriors, सासारौ in the battlefield, जलदौइव like water streams, संयुगमहीम् like two clouds, चेरतुः both chariots
Summary
The network of arrows released by both of them from the chariots were like water streams from two clouds in the battlefield
पदच्छेदः
| क्षिपतोः | क्षिपत् (√क्षिप् + शतृ, ६.२) |
| शरजालानि | शर–जाल (२.३) |
| तयोस्तौ | तद् (६.२)–तद् (१.२) |
| स्यन्दनोत्तमौ | स्यन्दन–उत्तम (१.२) |
| चेरतुः | चेरतुः (√चर् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| संयुगमहीं | संयुग–मही (२.१) |
| सासारौ | स (अव्ययः)–आसार (१.२) |
| जलदाविव | जलद (१.२)–इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क्षि | प | तोः | श | र | जा | ला | नि |
| त | यो | स्तौ | स्य | न्द | नो | त्त | मौ |
| चे | र | तुः | सं | यु | ग | म | हीं |
| सा | सा | रौ | ज | ल | दा | वि | व |