ततः प्रजग्मुः प्रशमं मरुद्गणा; दिशः प्रसेदुर्विमलं नभोऽभवत् ।
मही चकम्पे न च मारुता ववुः; स्थिरप्रभश्चाप्यभवद्दिवाकरः ॥
ततः प्रजग्मुः प्रशमं मरुद्गणा; दिशः प्रसेदुर्विमलं नभोऽभवत् ।
मही चकम्पे न च मारुता ववुः; स्थिरप्रभश्चाप्यभवद्दिवाकरः ॥
अन्वयः
ततः then, मरुद्गणाः hosts of gods, प्रशमम् tranquil, प्रजग्मुः attained, दिशः quarters, प्रसेदुः brightened, नभः sky, विमलम् clear, अभवत् became, मही earth, न चकम्पे no longer shook, मारुतः wind, ववौ blew, दिवाकरःचापि even the Sun, स्थिरप्रभः steady radiance, अभवत् becameM N Dutt
Thereupon the celestials attained their peace, the quarters were delighted, the atmosphere was clear, calm air began to prevail all over the earth, and the Sun appeared in its full rays.Summary
Then the host of gods attained tranquil, quarters brightened, sky became clear, earth no longer shook, wind blew and even the Sun became steady and radiant.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रजग्मुः | प्रजग्मुः (√प्र-गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| प्रशमं | प्रशम (२.१) |
| मरुद्गणा | मरुत्–गण (१.३) |
| दिशः | दिश् (१.३) |
| प्रसेदुर् | प्रसेदुः (√प्र-सद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विमलं | विमल (१.१) |
| नभोऽभवत् | नभस् (१.१)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| मही | मही (१.१) |
| चकम्पे | चकम्पे (√कम्प् लिट् प्र.पु. एक.) |
| न | न (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| मारुता | मारुत (१.३) |
| ववुः | ववुः (√वा लिट् प्र.पु. बहु.) |
| स्थिरप्रभश्चाप्यभवद् | स्थिर–प्रभा (१.१)–च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| दिवाकरः | दिवाकर (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | प्र | ज | ग्मुः | प्र | श | मं | म | रु | द्ग | णा |
| दि | शः | प्र | से | दु | र्वि | म | लं | न | भो | ऽभ | वत् |
| म | ही | च | क | म्पे | न | च | मा | रु | ता | व | वुः |
| स्थि | र | प्र | भ | श्चा | प्य | भ | व | द्दि | वा | क | रः |
| ज | त | ज | र | ||||||||