विमानेनानुरूपेण या याम्यतुलया श्रिया ।
पश्यन्ती विविधान्देशांस्तांस्तांश्चित्रस्रगम्बरा ।
भ्रंशिता कामभोगेभ्यः सास्मि वीरवधात्तव ॥
विमानेनानुरूपेण या याम्यतुलया श्रिया ।
पश्यन्ती विविधान्देशांस्तांस्तांश्चित्रस्रगम्बरा ।
भ्रंशिता कामभोगेभ्यः सास्मि वीरवधात्तव ॥
M N Dutt
Roaming at large with you in a car unequalled in beauty on the hill Kailāsa Mandara, Meru, in the garden of Caitraratha and all other celestial gardens, beholding many a country, wearing variegated clothes and garlands, I have been deprived of all pleasures and enjoyments, O hero, by your death.पदच्छेदः
| विमानेनानुरूपेण | विमान (३.१)–अनुरूप (३.१) |
| या | यद् (१.१) |
| याम्यतुलया | यामि (√या लट् उ.पु. )–अतुल (३.१) |
| श्रिया | श्री (३.१) |
| पश्यन्ती | पश्यत् (√दृश् + शतृ, १.१) |
| विविधान् | विविध (२.३) |
| देशांस्तांस्तांश्चित्रस्रगम्बरा | देश (२.३)–तद् (२.३)–तद् (२.३)–चित्र–स्रज्–अम्बर (१.१) |
| भ्रंशिता | भ्रंशित (√भ्रंशय् + क्त, १.१) |
| कामभोगेभ्यः | काम–भोग (५.३) |
| सास्मि | तद् (१.१)–अस्मि (√अस् लट् उ.पु. ) |
| वीरवधात् | वीर–वध (५.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | मा | ने | ना | नु | रू | पे | ण | या | या | म्य | तु |
| ल | या | श्रि | या | प | श्य | न्ती | वि | वि | धा | न्दे | शां |
| स्तां | स्तां | श्चि | त्र | स्र | ग | म्ब | रा | भ्रं | शि | ता | का |
| म | भो | गे | भ्यः | सा | स्मि | वी | र | व | धा | त्त | व |